17 फरवरी से आपके घर पहुंचेगी फाइलेरिया रोधी दवा

• लगभग 37.6 लाख लोगों को घर-घर खिलाई जायेगी दवा
• 10 दिनों में लगभग 3200 टीमें बांटेंगी दवा

वाराणसी । राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में फाइलेरिया की रोकथाम के लिए 17 फरवरी से 29 फरवरी 2020 तक फाइलेरिया उन्मूलन अभियान ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए)’ – आईडीए (ट्रिपल ड्रग थेरेपी) चलाया जाएगा। अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगे। वहीं छूटे हुये लोगों को दवा खिलाने के लिए 02 मार्च से मॉप-अप राउंड भी चलेगा। यह दवा ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं शहरी स्तर पर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से चलाया जाएगा। अभियान में दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों और वृद्धजन को छोड़कर यह दवा सभी को खिलाई जाएगी। अभियान के तहत लगभग 37.60 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी वृहस्पतिवार को दुर्गाकुंड स्थित मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में सीएमओ डॉ वीबी सिंह की अध्यक्षता में हुयी मीडिया ब्रीफिंग के दौरान दी गयी।

मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि जिल की अनुमानित जनसंख्या 42 लाख है। इसमें से दो साल तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों एवं वृद्धजन को छोड़कर लक्षित जनसंख्या लगभग 37.60 लाख है। अभियान में लगभग 3200 टीमों को काम पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। एक टीम में दो सदस्य रहेंगे। टीम में आशा, एएनएम, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं एनजीओ द्वारा लोगों को घर-घर जाकर दवा खिलाई जाएगी। एमडीए की दवा सरकार द्वारा साल में एक बार घर-घर मुफ्त खिलाई जाती है। यह दवा खाली पेट नहीं खाना है और एल्बेण्डाज़ोल की गोली चबाकर खाना है। स्वास्थ्य कर्मचारी परिवार के सदस्यों को अपने सामने ही दवा का सेवन कराएंगे। किसी भी परेशानी की अवस्था में नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

मुख्य चिकित्साधिकारी ने जन समुदाय से अपील की है कि अभियान के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा जरूर खाएं और दवा खाने से ही फाइलेरिया रोग से बचाव हो सकता है।

वेक्टर बोर्न डिजीज के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. एसएस कनौजिया ने बताया कि समान्य दिखने वाले व्यक्तियों में भी फाइलेरिया के पैरासाइट पाये जाते हैं जिसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है। इसलिए वर्ष में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा सभी को खाना चाहिए ताकि फाइलेरिया का संचरण न हो सके। अभियान के लिए निर्धारित की गयी टीमें 10 दिन तक काम करेंगी। एक टीम एक दिन में 25 घर (लगभग 125 से 150 व्यक्ति) कवर करेगी। इस कार्य की मॉनिटरिंग 640 सुपरवाइजर द्वारा की जाएगी। जिला स्तर पर क्षेत्रीय उप मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला मलेरिया/ फाइलेरिया विभाग के सभी कर्मचारी भी मॉनिटरिंग का कार्य करेंगे।

जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडेय ने बताया कि जिले के सभी ब्लाकों पर रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) का गठन किया जाएगा। आरआरटी टीम दवा खाने के बाद किसी को परेशानी होने पर उसका तुरंत उपचार करेगी। आरआरटी टीम में डॉक्टर, फार्मासिस्ट व पैरामेडिकल स्टाफ होंगे ।

बायोलोजिस्ट-प्रभारी फाइलेरिया नियंत्रण इकाई डॉ अमित कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष में एक बार एवं लगातार पाँच वर्ष तक दवा के सेवन से फाइलेरिया रोग से जनपद को मुक्ति मिल सकती है। जनपद में विगत वर्ष कि भांति ट्रिपल ड्रग थेरेपी – आईडीए होना है जिसके अंतर्गत डीईसी, एल्बेण्डाज़ोल के साथ आईवर्मेक्टिन की एक खुराक उम्र एवं ऊंचाई के आधार पर खिलाई जाएगी।
मीडिया ब्रीफिंग का संचालन जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने किया।

फाइलेरिया क्या है?

फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे समान्यतः हाथीपांव के नाम से जाना जाता है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। यह संक्रमण आमतौर पर बचपन में हो जाता है और शरीर की लासिका तंत्र को क्षतिग्रस्त कर देता है। फाइलेरिया को दीर्घकालिक विकलांगता का दूसरा प्रमुख कारण माना गया है। भारत के 16 राज्यों और 05 केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 256 जिलों के 63 करोड़ (35 प्रतिशत जिले उत्तर प्रदेश एवं बिहार से) भारतीयों को इस रोग से खतरा है।
फाइलेरिया के लक्षण– समान्यतः कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। बुखार, बदन में खुजली तथा पुरुषों के जननांग में तथा उसके आसपास दर्द या सूजन। पैरों व हाथों में सूजन, हाथीपांव और हाइड्रोसिल (अंडकोष में सूजन) होता है। किसी भी व्यक्ति को संक्रमण होने के बाद बीमारी होने में 05 से 15 साल लगते हैं।

फाइलेरिया कैसे फैलता है?
• गंदगी में मच्छर पनपते हैं;
• संक्रमित व्यक्ति को काटकर मच्छर संक्रमित हो जाते हैं;
• संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं;
• संक्रमित व्यक्तियों को हाथीपांव व हाईड्रोसिल का खतरा रहता है।

रोकथाम एवं नियंत्रण–
• मच्छरदानी का प्रयोग करें;
• आसपास साफ-सफाई रखें;
• अभियान में फाइलेरिया से बचाव की दवा खाएँ।

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