भाजपा कार्यकर्ता ने काशी दूरदर्शन के पुनः प्रसारण के लिए प्रधानमंत्री को लिखी पाती

वाराणसी । काशीवासियो को इस बात का गर्व है कि हम सभी प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में रहते है। इस संसदीय सीट पर पूरी दुनिया की नजर लगी हुई है । ऐसे में वाराणसी दूरदर्शन से प्रसारण का बंद होना काशी के लोगों के लिए एक बड़ा झटका और कष्टप्रद है। काशी के सांस्कृतिक विरासत को गांव में आमजन तक पहुंचाने का जो माध्यम था वह कड़ी टूट गई है । समस्त काशीवासियों का आपसे अनुरोध है फिर दूरदर्शन वाराणसी केंद्र से सुबह 8:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे के बीच कम से कम 2 घंटे प्रसारण पुनः शुरू किया जाए । साथ ही इसे लखनऊ दूरदर्शन से जोड़ते हुए सारे डीटीएच प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया जाए। जिससे यहां की सांस्कृतिक, शैक्षणिक सामाजिक, राजनीतिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का प्रसारण हो सके। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अरविंद मिश्रा #digitalchaikashi नें इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर प्रसारण शुरू कराने का अनुरोध किया है ।

श्री मिश्रा नें पत्र में लिखा है कि काशी में साहित्य, संस्कृति और संगीत का अथाह भंडार है। यहां की गंगा-जमुनी तहजीब इस शहर को दुनिया भर में अलग पहचान देती है। कला, नृत्य, साहित्य, दर्शन, मीमांसा, अनुशीलन और अध्ययन शहर की समृद्ध विरासत के गवाह है। यहां शिव और गंगा एक-दूसरे के पर्याय हैं। इस शहर को जानने की दुनिया भर के लोगों में जिज्ञासा है। शिव तो नटराज हैं। यही वजह है कि काशी के मंदिरों में संगीत की पूजा होती रही है। बनारस के संगीत में सम्मोहन है। ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी, होरी बनारस के संगीत की विरासत को समृद्ध करते हैं। भूगोल के लिहाज से बनारस की लोकेशन यूनिक है। इतिहास और भूगोल बताता है कि यह शहर राजघाट से अस्सी की ओर बढ़ा है और बसा है। यहां हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि संप्रदाय के लोग आए और बस गए। समृद्ध पारंपरिक विरासत के चलते ही बनारस दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में शुमार है। काशी में लघु भारत बसता है। यहां की संस्कृति और रहन-सहन दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है।

इसी सांस्कृतिक विरासत को देश के सुदूर गांव में बैठे लोगों तक पहुचाने का सशक्त माध्यम दूरदर्शन वाराणसी रहा है। मगर लगभग डेढ़ माह पहले दूरदर्शन वाराणसी केंद्र को बंद कर दिया गया। जबकि पूरी दुनिया की नजर बनारस की गतिविधियों पर लगी रहती है। दुनिया के तमाम राष्ट्राध्यक्ष आपके नेतृत्व में काशी आये। इससे काशी का मान दुनिया के मानचित्र पर पुरातन संस्कृति वाले शहर के साथ ही आधुनिक बनारस के रूप में जाना जाने लगा है। मगर वाराणसी दूरदर्शन केंद्र से प्रसारण बन्द होने के कारण बनारस एवं आसपास से जुड़ी गतिविधियां, समसामयिक , कला संस्कृति किसानों से जुड़े मुद्दे, सरकार से जुड़ी योजनाएं एवं सरकार से जुड़ी गतिविधियों का प्रसारण नहीं हो पा रहा है ।

 

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