रेल अफसरों की अनदेखी से व्यापारी बना रहे आंदोलन का रुपरेखा

अफसरों के जाते ही शिवपुर रैक साइटिंग पर समस्या जस की तस, लंबे समय से मिल रहा आश्वासन का लॉलीपॉप

वाराणसी। शिवपुर रेलवे स्टेशन के समीप बने क्लास वन रैक साइटिंग से सरकार को हर माह करोड़ो का राजस्व मिलता है। यहां रेलवे की मालगाड़ियों द्वारा लगभग रोज ही पूर्वान्चल के थोक व्यापारियों का खाद, नमक, प्याज, खाद्यान्न आदि मॉल पहुँचता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आये मॉल को तय समय सीमा में न हटाने पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है। वर्षाकाल में यह स्थल किसी नर्क से कम नहीं रहता। व्यापारी हर साल यहां बुनियादी सुविधाएं जुटाने की मांग तो करते है लेकिन आजादी के बाद से आज तक उन्हें आश्वासनो के लॉलीपॉप के अलावा कुछ नहीं मिला।

इस समस्या के खिलाफ अब अब तमाम व्यापारी व ट्रांसपोर्टर लामबंद होकर लम्बा आंदोलन चलाने की योजना बना रहे। कज्जाकपुरा निवासी व्यापारी अशोक कुमार सिंह व पांडेपुर निवासी ट्रांसपोर्टर अजय सिंह की माने तो 3 दिन पूर्व यहां नमक की रैक आई थी।जब तमाम वाहन चालक मॉल का उठान करने पहुंचे तो वहां की स्थिति भयावह थी। रैक साइट के सड़कों पर कई फुट पानी भरा था। पूरा इलाका जलाशय का रूप ले चुका था। यहाँ पहले से सड़कों पर अनगिनत जानलेवा गड्ढे उभरने से ट्रकों का निकलना लंबे समय से बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है। जुर्माना से बचने व पुनः रैक आगमन की सूचना से व्यापारियों को मॉल उठाना मजबूरी बन गई तो हिम्मत कर वहां दर्जनों ट्रकों का बेड़ा लगाया गया, लेकिन मॉल लदी ट्रक पानी में पलट गई।तब ट्रांसपोर्टरों संग चालक मजदूर व व्यापारी अचानक हड़ताल पर चले गए। मॉल उठान बन्द होने की खबर जब लखनऊ पंहुची तो रेलवे के कई अधिकारी मौके पर आये व तुरन्त जलनिकासी कराने व अन्य सुविधाओं का आश्वासन देकर काम शुरू कराया। अधिकारियों के जाने के बाद अब भी यहां समस्या जस की तस बनी हुई है। काम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही जिससे व्यापारी पुनः बेहद नाराज है।

लंबे समय से बनी है समस्या

कोनिया निवासी ट्रांसपोर्टर सभाजीत यादव,गोपाल यादव, चमाव निवासी पिंटू यादव, पार्वती नगर निवासी प्रदीप सिंह समेत तमाम लोगों ने बताया कि यहां हर माह लगभग 30 मालगाड़ियों की रैक पहुँचती है। वर्षा काल में रेल साइट से लेकर आसपास के इलाकों में इतना पानी भर जाता है कि ट्रकों के बोनट व इंजन तक डूब जाते है, ऐसे में वे आखिर व्यापारियों का मॉल निकाले तो कैसे? तमाम मुसीबतों का सामना करते हुए मजदूरों और ट्रक चालकों को इन्हीं दुश्वारियां में 24घण्टे काम करना पड़ता है। पहले सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही रैक उतरता था लेकिन नये आदेश के तहत अब यहां 24 घण्टे रैक उतरता रहता है। नई व्यवस्था से मजदूरों संग व्यापारियों का सुख चैन भी छीन चुका है। भारी परेशानी झेल रहे मजदूरों , ट्रक चालकों का कहना है कि अब तो हम लोग शिकायत करते, करते भी थक गये,आंदोलन ही विकल्प बचा है।

करोड़ो के कमाऊ स्थल पर सुविधाओं का टोटा

तमाम व्यापारियों व मजदूरों की मानें तो वर्षा काल में दुःख देने वाले इस स्थान पर गर्मी के दिनों में पेयजल का इतना अभाव रहता है कि मजदूरों को घर से पानी लेकर आना पड़ता है। लंबे समय से यहां न शौचालय है ना रैक से निकले माल को वर्षा काल में बचाने के लिए कोई सेड अथवा छाया स्थल। व्यापारी बिल्टी लेकर धूप व वर्षा झेलते यत्र तत्र खड़े नजर आते है। सबसे विचित्र यह की यहां कोई पक्का प्लेटफार्म भी नहीं बना है। जल निकासी का समुचित साधन ना होने के कारण आसपास के कालोनियों का गन्दा पानी भी रेल साइट पर ही जमा हो जाता है, जिससे यहां की स्थिति और नारकिय हो जाती है। व्यापारियों का कहना है कि रेलवे को रोज प्रति रैक भाड़ा 20 से 25 लाख रूपये मिलता है। सवाल यह है कि करोड़ो का राजस्व देने वाले इस कमाऊ स्थल पर आखिर सुविधाओं का टोटा क्यों बना हुआ है ? आखिर कब तक लोगों को यहां परेशानी झेलनी होगी ?

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