आंदोलन के आज दूसरे दिन एमडी कार्यालय पर कार्यबहिष्कार कर धरना प्रदर्शन

वाराणसी -।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियो की तिलक हाल लखनऊ में मंत्रिमंडल के साथ निजीकरण के मुद्दे पर वार्ता का दौर जारी रहा। बनारस के विधुतकर्मियो ने संघर्ष समिति के आह्वान पर तीसरे चरण के आंदोलन के आज दूसरे दिन भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर कार्यबहिष्कार कर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली व्यवस्था में सकारात्मक सुधार के अपने संकल्प को दोहराते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री  से अनुरोध किया कि ऊर्जा क्षेत्र में प्रबन्धन द्वारा तैयार किये जा रहे टकराव के वातावरण को समाप्त करने हेतु प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निजीकरण के फैसले को वापस लिया जाए ।

वक्ताओ ने बताया कि कल रात के 9बजे तक ऊर्जामंत्री से संघर्ष समिति की एक सफल वार्ता हुई और उन्होंने मिनुट्स ऑफ मीटिंग जारी करने हेतु अध्यक्ष पावर कारपोरेशन को निर्देशित किया किन्तु ऊर्जामंत्री के जाते ही अध्यक्ष पावर कारपोरेशन ने इस सरकार को बदनाम करने हेतु समझौते की कॉपी पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और प्रदेश की जनता को सरकार के खिलाफ आक्रोशित करने का काम किया गया। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने कल से चल रहे पूरे दिन का कार्य बहिष्कार आज भी जारी रहा । इस दौरान फॉल्ट की मरम्मत सहित उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कामकाज प्रभावित रहे। यहां तक कि वाराणसी के लगभग 60-70% इलाकों में बिजली संकट रहा। इस बीच ऊर्जा प्रबंधन और जिला प्रशासन ने बिजली सप्लाई बहाल रखने के लिए पुलिस के पहरे के साथ कई वैकल्पिक इंतजाम किए, लेकिन फॉल्ट के आगे वो सभी फेल हो गए। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रबंधन और सरकार को चेतावनी दी कि अगर संविदा कर्मचारी से लेकर मुख्य अभियंता तक में से किसी को भी गिरफ्तार किया गया या कोई दमनात्मक कार्यवाही हुई तो उसी समय अनिश्चितकालीन हड़ताल और जेल भरो आंदोलन शुरू कर देंगे।

बिजली कटौती की शिकायतों से पटा ट्विटर, कई जगह 24 घंटे से बिजली गुल

यह तो सिर्फ एक बानगी है। सोशल मीडिया और खासकर ट्विटर बिजली कटौती की शिकायतों से भरा पड़ा है। मगर ऊर्जा मंत्री से लेकर, अधिकारियों और सांसद-विधायकों के पास इन शिकायतों का कोई जवाब नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया तक बिजली कटौती से हाहाकार मचा है। कई जगह बिजली कटौती के 20-24 घंटे बीत गए हैं, मगर कोई सुध लेने वाला नहीं है।

संघर्ष समिति ने ये भी बताया कि कार्य बहिष्कार के दौरान अस्पतालों एवं इमरजेंसी सेवाओं की विद्युत आपूर्ति बनाए रखा गया जिससे की आम जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े किंतु बाकी जो किधर जो बिजली कर्मी चालू हालत में छोड़कर आए थे किंतु किसी प्रकार की फॉल्ट आने पर वह बंद हो गया कार्य बहिष्कार होने के कारण उसे ठीक नहीं किया गया। बिजली कर्मियों ने आम जनता से पुनः अपील अपील किया कि निजी करण से केवल बिजली कर्मियों का नुकसान नहीं होगा बल्कि आम जनता को महंगी बिजली का दंश झेलना पड़ेगा इसलिए आप सभी इस आंदोलन का समर्थन करें । कार्य बहिष्कार से उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा के लिए संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव ऊर्जा एवं चेयरमैन यूपीपीसीएल को जिम्मेदार मानते हुए सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाया |

संघर्ष समिति ने अपने  मुख्यमंत्री  से पुनः अनुरोध किया कि इन ब्यूरोक्रेट्स की वजह से जो सरकार की छवि की धूमिल हुई उनके ऊपर सख्त कारवाई करते हुए निजीकरण के फैसले को जनहित में वापस कराये। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद् के जिलाध्यक्ष शशिकान्त श्रीवास्तव ने विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा निजीकरण के विरुद्ध प्रदेशब्यापी कार्य बहिष्कार मे सरकार की तरफ से यदि आन्दोलन के दमन की कार्यवाही की जाती है तो आन्दोलन की धार को और गति प्रदान किये जाने हेतु समर्थन देगा |

बैठक को सर्वश्री आर0के0वाही,ई0 केदार तिवारी,ई0 चंद्रशेखर चौरसिया, डॉ0 आर0बी0 सिंह,ई0 संजय भारती, वेदप्रकाश राय,ई0 संजय भारती,रेनु मौर्य,शशिकिरण मौर्य, रमन श्रीवास्तव,नीरज बिंद, सुनील कुमार यादव, ई0जगदीश पटेल, अंकुर पाण्डेय,रमाशंकर पाल,वीरेंद्र सिंह, ई0 जयशंकर राय,मदन लाल श्रीवास्तव,महेंद्र मौर्य, संतोष वर्मा,आर0के0 राय, अमितानंद त्रिपाठी, संतोष कुमार, हेमंत श्रीवास्तव आदि पदाधिकारियो ने संबोधित किया।

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