डीरेका: प्रशासनिक भवन में लगी भीषण आग

महत्वपूर्ण फाइलों संग तमाम कम्प्यूटर, उपकरण हुए खाक करोड़ो का नुकसान , भंडार गृह से फाइल सेक्शन तक पहुंच गई आग, डीरेका, गेल, फायर सर्विस के कर्मचारी घण्टो जूझते रहे .

वाराणसी। मंडुवाडीह स्थित डीरेका प्रशासनिक भवन के प्रौद्योगिकी भवन में आज सुबह भीषण आग लग गयी। इस दौरान भवन के अंदर मौजूद तमाम कम्प्यूटर, उपकरण व अनगिनत दस्तावेज जल कर खाक हो गए। इस दौरान करोड़ो का नुकसान हुआ। गेल डीरेका समेत कई विभागों के दमकल कर्मियों ने मिलकर घण्टो मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बताया गया कि आज सुबह अचानक उक्त भवन के ऊपरी तल से धुआं उठने से परिसर में हड़कम्प मच गया। खतरे की आशंका से ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवानों ने तत्काल इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देते हुए फायर ब्रिगेड को सूचित किया।

विश्वकर्मा पूजा से एक दिन पहले आग की सूचना मिलते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही डीरेका फायर ब्रिगेड व गेल इंडिया की कई गाड़ियां मौके पर पहुँच गई। शुरुआत में दमकल कर्मियों व कर्मचारियों को काफी दिक्कत आई। भवन के अंदर काफी धुआं भर जाने से डीरेका सेफ्टी विभाग के कर्मचारियों ने सीढ़ी व क्रेन मंगाकर खिड़कियों में लगे शीशे को तोड़ना शुरू किया तब जाकर फायर ब्रिगेड के जवानों ने बाहर से पानी की बौछार मारनी शुरू कर दी। तब तक उत्तर प्रदेश फायर सर्विस कीगाड़ियों के साथ स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुँच गयी।

काफी मशक्कत के बाद लगभग साढ़े बजे किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका। डीरेका के कर्मचारियों ने बताया की अगर डयूटी अवधि में आग लगती तो स्थिति भयावह हो सकती थी। मौके पर डीरेका के सभी उच्चाधिकारी पहुंच गये थे। मौके पर पहुँचे मुख्य संरक्षा अधिकारी नितिन मेहरोत्रा ने बताया की उन्हें सुबह 6:15 पर आग लगने की सूचना मिली। उन्होंने बताया कि आग भंडार सामग्री भवन में लगी जो फ़ाइल सेक्शन तक पहुँच गयी थी।

नुकसान के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया की आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। आग से हुए नुकसान के बारे में पूछने पर कुछ अधिकारी बात करने से कतराते रहे। आग पर काबू पाने के बाद जब कुछ मीडियाकर्मियों ने भवन के अंदर जाकर फ़ोटो लेने की कोशिश की तो आरपीएफ द्वारा उन्हें रोक दिया गया। इतने सुरक्षित परिसर में आग कैसे व किन कारणों से लगी? अभी तक इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है। आग लगने के कारणों को लेकर कर्मचारियों संग स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चा होती रही।

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