मानसून जाते जाते फिर भिंगोने को तैयार

अगले दो दिनों में वर्षा के संकेत, बंगाल की खाड़ी में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय

डाँ.लोकनाथ पाण्डेय

वाराणसी। बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय हो जाने के कारण आज वाराणसी व आसपास के इलाकों में कहीं कम तो कहींजमकर वर्षा हुई। आज सुबह से बादलों का जमावड़ा हुआ तो10बजते बजते गरज चमक संग वर्षा भी शुरू हो गई। दोपहर तक मौसम सुहावना बना रहा। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के चलते उत्तर प्रदेश खासकर पूर्वांचल में फिर से वर्षा के संकेत बन रहे हैं। यदि अनुमान सही हुए तो अगले दो दिनों में कुछ इलाकों में पुनः बादल झूम कर बरसेंगे। बता दें कि मानसून अब जल्द ही विदाई लेने वाला है, लेकिन जाते-जाते एक बार फिर कुछ राज्यों में झमाझम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लोगों को उमसभरी गर्मी से अगले दो दिनों में कुछ राहत मिल सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने 23 और 24 सितंबर को इन राज्यों में बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। इस साल पूरे देश में सामान्य से 7 फीसद अधिक बारिश हुई है, लेकिन उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 15 फीसद कम बारिश दर्ज की गई है। सितंबर के अंत में मानसून के समापन का दौर माना जाता है, लेकिन इस बार अक्टूबर में भी बारिश हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

मौसम में बदलाव शुरू

शहरों के जिन इलाकों में कंक्रीट के जंगल खड़े हैं वहां गर्मी व उमस का सिलसिला जारी है। बीएचयू के अलावा चिरईगांव व आसपास के गंगा तटीय इलाकों में मौसम का बदलाव महसूस किया जा रहा। हरियाली वाले ग्रामीण इलाकों में दिन में उमस व गर्मी अवश्य है लेकिन रात होते ही तापमान में कमी भी महसूस की जा रही। ग्रामीण इलाकों में अब फसल व पेड़ पौधों की पत्तियों पर हल्की शीत का आभास भी होने लगा है । बुजुर्गों की मानें तो धीरे धीरे यही शीत अब गुलाबी ठंड का एहसास भी कराएगी।

पुलिस लाइन के आसपास बिकने लगा कम्बल

अभी जाड़ा आने में चंद दिनों की देर है, लेकिन पुलिस लाइन के आसपास सड़क किनारे कंबलों का बाजार सज गया है। सड़क किनारे बिकने वाले कंबल आजकल बेहद सस्ते दाम पर बिक रहे । गुजरात ,राजस्थान के घुमंतू लोग लालपुर में डेरा डालकर यहां कंबल बेंच अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। यहां कम्बल बेच रही एक महिला ने बताया कि कुछ पुलिस कर्मियों की कृपा पर उसके परिवार को यहां जगह मिल गई। इसके पूर्व उसके परिजन चादर व खिलौने आदि घूम घूम कर बेचा करते थे। पिछली बार के बचे कंबल इस बार जाड़े के पूर्व बेचने की तैयारी है ,ताकि पुराना माल बिक जाने पर नए स्टाक व स्वेटर आदि की खरीदारी हो सके।

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