ज्ञानवापी मामला-अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की अपील पर सुनवाई एक को

वाराणसी। ज्ञानवापी-विश्वनाथ मंदिर परिसर मामले को लेकर दाखिल मुकदमे की सुनवाई करने के क्षेत्राधिकार को लेकर सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्टट्रैक) के फैसले के खिलाफ प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से जिला जज उमेशचंद्र शर्मा की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने उक्त मामले की सुनवाई करने के सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती दी थी जिसे सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्टट्रैक) ने 25 फरवरी को खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है। सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी करने का आदेश देते हुए अग्रिम सुनवाई के लिए एक सितंबर की तारीख मुकर्रर कर दी है ।

यह है मामला ——–

बता दें कि प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ तथा अन्य पक्षकारों ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण तथा हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में मुकदमा दायर किया था। इस मामले में वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने ज्ञानवापी परिसर स्थित तथाकथित विवादित स्थल का भौतिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भारतीय सर्वेक्षण विभाग से राडार तकनीक सर्वेक्षण कराने की सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्टट्रैक) की अदालत मे अपील कर रखी है। इस अपील का निस्तारण होना है।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्टट्रैक) की अदालत में गत फरवरी माह में सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से दलील दी गई थी कि जिस संपत्ति को वादी पक्ष द्वारा विवादित बताया जा रहा है वह संपत्ति मस्जिद है और वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। वक्फ एक्ट के प्रावधान के तहत मस्जिद, कब्रिस्तान,इमामबाड़ा,मजार आदि से संबंधित विवाद का निस्तारण सिविल कोर्ट द्वारा नहीं किया जा सकता।मस्जिद से संबंधित वाद के सुनवाई का क्षेत्राधिकार लखनऊ स्थित वक्फ न्यायाधिकरण बोर्ड को है। प्रतिवादी पक्ष ने अपने दलील के समर्थन में हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट की नजीरों को भी अदालत के समक्ष पेश किया। वहीं वादमित्र तथा वादी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि उक्त विवादित परिसर स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ मंदिर का अंश है। इसके नीचे विश्वेश्वरनाथ की ज्योर्तिलिंग मौजूद है। ज्ञानवापी में नए मंदिर बनाने तथा पूजा-पाठ करने आदि को लेकर हिंदु पक्षकारों की ओर से वर्ष 1991 में सिविल जज की अदालत में मुकदमा दाखिल किया गया था जबकि नया वक्फ एक्ट 1995 में गठित हुआ। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा अपने वक्फ रजिस्टर में वक्फ एक्ट 1954 के अंतर्गत ज्ञानवापी मस्जिद का रजिस्ट्रेशन होना बताया गया है। जबकि यह एक्ट यूपी में लागू नहीं हुआ था। इस स्थिति में मुकदमे की सुनवाई का अधिकार सिविल अदालत को ही है। वादमित्र ने अपने दलील के समर्थन में सर्वोच्च अदालत की नजीरों को अदालत में प्रस्तुत किया। वादी तथा प्रतिवादी पक्ष की बहस सुनने तथा नजीरों के अवलोकन के पश्चात् अदालत ने अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया और अपने निर्णय में कहा कि मुसलमानों के मध्य विवाद की सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार वक्फ न्यायाधिकरण को है जबकि गैर मुस्लिम के स्वत्व के विवाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट को है। जिसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है।

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