बच्चों किशोरियों और महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए दी गई जानकारी

वाराणसी, फरवरी । जनपद के समस्त ब्लॉकों व नगर के आंगनबाड़ी केन्द्रों व उपकेन्द्रों पर बुधवार को बचपन दिवस, सुपोषण स्वास्थ्य मेला एवं बाल सुपोषण उत्सव का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से जन समुदाय को कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ने, सबका स्वास्थ्य – सबका विकास के संदेश को जन आंदोलन बनाने आदि के बारे में जागरूक किया गया। इस क्रम में अराजीलाइन ब्लॉक के शिवरामपुर, भतसर, महगांव, दयापुर, सजोई, चौखंडी, कुरौना, असवारी, कुरौता, सेवापुरी ब्लॉक के भोरकला, करधाना, अदमपुर, विहड़ा, छतेरी, गोरई, काशी विद्यापीठ ब्लॉक के उच्चगांव, चंदापुर, कोरौता, चाँदपुर, भट्टी, चितईपुर एवं नगर के बजरडीहा, छित्तुपुर, रामनगर आदि आंगनबाड़ी केन्द्रों व उपकेन्द्रों पर बचपन दिवस, सुपोषण स्वास्थ्य मेला एवं बाल सुपोषण उत्सव आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में गर्भवती महिलाओं के खून, पेशाब, वजन एवं ब्लड प्रेशर आदि की जांच, बच्चों के वजन और स्वास्थ्य जांच, किशोरियों के वजन और एनीमिया जांच, पोषण परामर्श, स्तनपान एवं टीकाकरण के साथ-साथ आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां प्रदान की गई।
नगरीय बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मनोज कुमार गौतम ने बताया कि बचपन दिवस प्रत्येक माह की 05 तारीख को मनाया जाता है तथा इसके साथ बाल सुपोषण उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिवस माह में पड़ने वाले बच्चों का जन्मदिन केक काटकर मनाया जाता है और साथ ही सभी बच्चों को पुष्टाहार से बना भोजन खिलाया जाता है। वहीं सुपोषण मेला प्रत्येक महीने के प्रथम बुधवार को मनाया जाता है, जिसमें एएनएम, समस्त आशा और आगनबाड़ी कार्यकर्ता आपसी समन्वय स्थापित करके अपने कार्यक्षेत्र की सभी गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों को बुलाकर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने का कार्य करती हैं।
इस दौरान आईसीडीएस सुपरवाइज़र, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मौजूद गर्भवती महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, संतुलित एवं स्वस्थ खानपान, स्तनपान आदि के बारे में बताया। महिलाओं को स्तनपान के बारे में जागरूक करते हुए बताया गया कि शिशु के लिए माँ का दूध अमृत के समान होता है। माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है बच्चा अगर छह माह तक अपना दूध पिलाती है तो शिशु को बहुत सी बीमारियों से बचाया जा सकता है।
वहीं किसी कारणवश स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिकाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से आयरन की गोलियां प्रदान की गई। किशोरी बालिकाओं को व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वच्छता के साथ-साथ महावारी के दौरान बरती जाने वाली स्वच्छता, शिक्षा से संबन्धित आदि की जानकारी दी गई। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए स्वच्छ पेयजल और शौंच के बाद एवं खाने से पहले साबुन से हाथ धोने के प्रयोग के बारे में प्रोत्साहित गया।

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