टीबी के गंभीर मरीजों को इंजेक्शन से मिला छुटकारा, अब दवाओं से होगा पूरा इलाज

29 के बजाय नौ महीने में होगा पूरा इलाज
वाराणसी, फरवरी । राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी के गंभीर मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन से अब छुटकारा मिल सकेगा और उनका सम्पूर्ण इलाज दवाओं के जरिये किया जाएगा। टीबी के गंभीर मरीजो को पीड़ा रहित उपचार प्रदान कराने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से प्रयास कर रहे हैं ताकि देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त किया जा सके।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद में 20 फरवरी 2020 से बिना इंजेक्शन टीबी का उपचार शुरू करने की योजना का शुरू होने जा रही है। वर्तमान में टीबी के एक मरीज को 25 इंजेक्शन लगाये जाते है और छह से नौ माह या अधिकतर से 11 माह और गंभीर मरीजों को 30 माह तक दवा लेनी होती है। इस दौरान मरीजों को इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं । खासकर बच्चों के मामले में ज्यादा दिक्कतें आती है। लेकिन अब इन सारी समस्याओं से मरीजों को बडी राहत मिलेगी और भारत सरकार द्वारा यह नई पहल टीबी मरीजों के लिए मरहम का काम करेगी। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के मरीजो को सिर्फ दवा के माध्यम से नि:शुल्क उपचार करने की योजना बना ली है। इसके लिए वाराणसी सहित प्रदेश के समस्त टीबी अधिकारियों को 05 से 07 फरवरी तक आगरा मे प्रशिक्षण दिया जायेगा।


जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जनपद में साल 2019 मे क्षय रोगियों की संख्या 8559 थी जिनका निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। वहीं साल 2019 मे जनपद में क्षय रोग से ग्रसित 1688 बच्चे देखे गए जिसमें से 1082 बच्चे पब्लिक और 606 बच्चे प्राइवेट नोटिफ़ाई किए गए। सरकार हर एक टीबी मरीज के सम्पूर्ण उपचार के लिए महंगी दवा निःशुल्क प्रदान कर रही है। उन्होने बताया कि 20 फरवरी से जिले स्तर पर टीबी के मरीजो के लिए इंजेक्शन फ्री ओरल ट्रीटमेंट शुरू किया जाएगा। नए तरीके से इलाज के लिए जिलेभर के डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। नर्सिंग स्टाफ की ट्रेनिंग भी शुरू की जाएगी। भारत सरकार ने सन 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य रखा है। इसके लिए तेजी से काम हो रहा है।

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