दुनिया में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कैसे संभला भारत, जानें सफलता का राज

दुनिया के कई देशों में एक बार फिर कोरोना मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है। इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी अपनी चिंता जाहिर की है। वहीं इन सबके बीच अच्छी खबर यह है कि भारत ने अभी तक खुद को संभाले रखा है। जहां एक तरफ दुनियाभर में कोरोना के मामले में लाखों में दर्ज हो चुके हैं तो वही भारत में करोड़ों की जनसंख्या के बीच भी इसके कुछ ही मामले सामने आए हैं।

कोरोना की तीन लहरों से लिया सबक

दरअसल, इसके पीछे सरकार, सरकारी नीतियां, प्रशासन, वैज्ञानिक, डॉक्टर, मेडिकल टीम, सुरक्षाकर्मी, स्वयंसेवियों और देश की जनता जनार्दन का वह सराहनीय योगदान छिपा है जो देश में कोरोना की पिछली तीन लहरों के दौरान देखने को मिला था। यही कारण है कि भारत ने अभी तक इस महामारी से निपटने के लिए खुद को संभाले रखा है।

देश की मेडिकल व्यवस्था को किया दुरुस्त

केवल इतना ही नहीं भारत ने कोरोना की तीन लहरों से सतर्क होते हुए देश की मेडिकल व्यवस्था को भी दुरुस्त किया। जहां-जहां कमियां रह गई थीं उन सभी को सरकार ने तमाम प्रयासों के जरिए पूरा किया। जब प्रथम विश्व युद्ध हुआ था, जब द्वितीय विश्व युद्ध हुआ था, तब भी इतने देश युद्ध से प्रभावित नहीं हुए थे, जितने कोरोना से हुए हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए भारत ने हर स्तर पर अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़ा परिश्रम किया है। इसकी साक्षी पूरी दुनिया तब बनी जब भारत ने न केवल देशवासियों की सुरक्षा हेतु कोविड रोधी वैक्सीन बनाई बल्कि कोरोना महामारी के सम्मुख विश्व के असहाय देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराकर उनकी मदद की। इसमें दुनिया के तमाम छोटे व बड़े देश शामिल थे।

कोविड महामारी से लड़ाई में कहां खड़ा भारत ?

वर्तमान में भारत सरकार पूरी तरह से अलर्ट दिख रही है। केंद्र के साथ-साथ राज्यों की सरकारें भी कोरोना संबंधित अपनी तैयारियों को लेकर समीक्षा में जुटी हैं। वहीं कोरोना सैंपल के जीनोम सीक्वेंसिंग कराने पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। वहीं बाहर से आने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत 24 दिसंबर से प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय उड़ान से आने वाले यात्रियों की कोरोना की रैंडम जांच की जाएगी। ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत दुनिया में कहीं बेहतर स्थिति में लगता है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार दिख रहा है।

वैक्सीन का विकास

उधर वैक्सीन के विकास की बात करें तो महामारी के करीब एक साल बाद ही वैज्ञानिकों ने ऐसे टीके विकसित करने में कामयाबी हासिल कर ली थी, जो कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करने में सफल रहे थे। भारत ने भी कोरोना के शुरुआती दौर में ही टीके विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। महामारी के डेढ़ साल से अधिक समय में देश के पास दो टीके थे। स्थानीय रूप से उत्पादित कोविशील्ड और स्वदेशी रूप से विकसित कोवैक्सिन। इन दोनों ही टीकों की मदद से भारत ने कोरोना के खिलाफ लंबी जंग लड़ी और अब भारत का नेजल वैक्सीन भी आ गया है।जी हां, भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है, यानि कि अब आपको इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं होगी। वैक्सीन के विकास में भारत दुनिया के विकसित देशों से भी अग्रणीय रहा है।

भारत का विश्वरूप जिसे पहले भी देख चुकी दुनिया

महज इतना ही नहीं कोविड के समय में भारत ने न केवल अपने देश वासियों की चिंता की और उन्हें कोरोना मुक्त किया बल्कि वैक्सीन मैत्री के माध्यम से दुनिया के अनेक देशों को वैक्सीन प्रदान कर महामारी से बचाया। यह भारत का विश्वरूप था जिसे पूरी दुनिया ने देखा और सराहा। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की जिस अवधारणा को हम हमेशा से जीते आए हैं आज उसे भारत ने साकार कर दिखाया और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने अप्रतिम सफलता हासिल कर दिखाई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नए प्रतिमान स्थापित कर दिए। जहां आज सारा विश्व अलग-अलग खेमों में बंटा हुआ नजर आता है, वहीं भारत ऐसा देश बन गया है जिसके या तो सभी दोस्त है या फिर जो नहीं है वो बनना चाहते हैं। रूस और अमेरिका जैसे दोनों ही देश भारत को आज अपना निकट मित्र मानते हैं।

220 करोड़ का सफल वैक्सीनेशन अभियान

भारत का कोविड रोधी वैक्सीनेशन अभियान विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान बना जिसमें अभी तक 220 करोड़ से भी अधिक वैक्सीन लगाई जा चुकी है। भारत का वैक्सीनेशन अभियान अभी भी लगातार जारी है। करीब एक साल के भीतर ही भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोने के खिलाफ जारी लड़ाई जीतने के लिए कारगर टीका बनाया। आज उन्हीं के बलबुते भारत को बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है।

भारत में कोविड का पहला मामला सामने आने के लगभग एक साल बाद ही देश ने जनवरी 2021 में टीकाकरण अभियान शुरू किया था। पीएम मोदी ने कोविड के प्रबंधन के लिए परीक्षण और टीके में निरंतर वैज्ञानिक रिसर्च की अपील की थी। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में सभी का टीकाकरण कार्यक्रम बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य रहा लेकिन भारत ने नवंबर 2022 तक अपनी 88 फीसदी से अधिक वयस्क आबादी को सफलतापूर्वक टीका लगाकर एक बेंचमार्क स्थापित किया।

प्रभावी Co-WIN प्लेटफॉर्म

भारत के टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के पीछे डिजिटल Co-WIN प्लेटफॉर्म रहा। इस प्लेटफॉर्म को केंद्र सरकार की ओर से विकसित किया गया था। पीएम मोदी ने 16 जनवरी, 2021 को इसकी शुरुआत की। यह ऑनलाइन पोर्टल नागरिकों को कभी भी और कहीं भी वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट बुक करने में सक्षम बनाता है। Co-WIN एप ने अलग-अलग टाइम स्लॉट की पेशकश से लेकर टीके और टीकाकरण केंद्रों की पसंद तक सुनिश्चित की, जिससे लोगों के लिए टीकाकरण करना काफी आसान हो गया।

कोविड से बचाव के उपाय

इन सबके अलावा कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए कोविड से संबंधित सख्त प्रतिबंध भी काफी सहायक रहे। इन्हें देशभर में लागू किया गया और जनता ने उनका पालन भी किया। संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए लॉकडाउन सहित अन्य कई प्रतिबंधों की घोषणा भी की गई, कंटेनमेंट जोन बनाए गए। वहीं, फेस मास्क, हैंड सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग वायरस को फैलने से रोकने का कारगर हथियार बना। उल्लेखनीय है कि भारत अपने 130 करोड़ से अधिक नागरिकों के साथ कोरोना वैश्विक महामारी का डटकर मुकाबला करने को तैयार है।

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