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दालों का आयात बढ़ा, कीमतें स्थिर हुईं : सरकार का दावा
 

सरकार का कहना है कि दाल दलहनों पर स्टॉक सीमा लगाने और आयात के माध्यम से आपूर्ति बढ़ाने से दालों की खुदरा कीमतों में स्थिरता आयी है।सरकार ने कहा है कि इस साल अप्रैल से अब तक 15,11,147 टन दाल दलहन का आयात हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर तक दाल दलहन आयात13,87,913 टन के बराबर था।उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दालों की खुदरा कीमतों में पिछले पांच महीनों में काफी हद तक स्थिरता आ गई है। उसका कहना है कि अब चना, अरहर, उड़द और मूंग की कीमतों में पिछले साल की तुलना में या तो गिरावट आई है या स्थिरता बनी हुई है।

भारत ने इस दौरान अरहर, उड़द, मूंग, समूर और चने का आयात किया।सरकार ने दालों की जमाखोरी और कृत्रिम कमी के कारण बढ़ी हुई कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 02 जुलाई 2021 को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत मूंग को छोड़कर सभी दालों पर भंडारण सीमा लागू कर दिया।बयान में कहा गया है कि दालों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-सीपीआई मुद्रास्फीति जून में 10.01 प्रतिशत थी जो लगातार गिरते हुए अक्टूबर में गिर कर 5.42 प्रतिशत पर आ गयी। दालों की मुद्रास्फीति अक्टूबर, 2020 में 18.34 प्रतिशत अधिक थी।

इसी तरह, दालों के लिए थोक मूल्य सूचकांक-डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति जून, 2021 में 11.56 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर, में 5.36 प्रतिशत हो गई थी।सरकार ने अरहर, उड़द और मूंग के आयात को 15 मई से 'मुक्त श्रेणी' में कर दिया ताकि इनका सुचारू और निर्बाध आयात सुनिश्चित किया जा सके। अरहर और उड़द के संबंध में मुक्त व्यवस्था को 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ा दिया गया है। सरकार का कहना है इन निर्णयों से आयात नीतिगत उपायों के परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों की इसी अवधि की तुलना में अरहर, उड़द और मूंग के आयात में पर्याप्त वृद्धि हुई है और इससे कीमतें नरम हुई हैं।