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चीन के कब्जे और दावे कभी स्वीकार्य नहीं: भारत
 

भारत ने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन की उस रिपोर्ट को संज्ञान में लिया है जिसमें चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के अंदर आकर सौ मकानों वाला एक गांव बनाने की बात कही गयी है और कहा है कि सरकार ने चीन के ऐसे अवैध कब्जे और उसके गैरवाजिब दावों को कभी स्वीकार नहीं किया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यहां मंत्रालय की नियमित ब्रीफिंग में भारत तिब्बत सीमा पर अरुणाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों में चीन के अवैध कब्जे वाले भारतीय के इलाकों में गैरकानूनी निर्माण का कड़ा विरोध व्यक्त किया है तथा सीमावर्ती इलाकों में नागरिकों के जीवनस्तर को सुधारने और राष्ट्रीय संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिए अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना जारी रखेगा।

प्रवक्ता ने कहा कि हमने अमेरिकी रक्षा विभाग की अमेरिकी कांग्रेस में पेश की गयी उस रिपोर्ट को संज्ञान में लिया है जिसमें पूर्वी सेक्टर में भारत तिब्बत सीमा पर चीनी पक्ष द्वारा निर्माण गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। इस वर्ष की शुरूआत में भी मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आयीं थीं। उन्होंने कहा, “जैसा कि हमने कहा कि चीन ने बीते कुछ वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां शुरू कीं हैं जिनमें वे इलाके भी हैं जिन पर वह दशकों से अवैध कब्जा किये हुए है। भारत ने अपनी प्रादेशिक सीमा में ऐसे ना तो अवैध कब्जे को और ना ही चीन के गैरवाजिब दावों को स्वीकार किया है।

श्री बागची ने कहा कि सरकार ने हमेशा ही ऐसी गतिविधियों पर राजनयिक माध्यम से कड़ा विरोध व्यक्त किया है और भविष्य में भी ऐसा करता रहेगा। इसके साथ ही जैसा पहले भी कहा जा चुका है कि सरकार ने सीमा पर अवसंरचनात्मक विकास को बढ़ाया है जिनमें सड़कों एवं पुलों का निर्माण शामिल है। इससे स्थानीय जनता की कनेक्टिविटी की मांग पूरी हुई है। सरकार अरुणाचल प्रदेश सहित सभी सीमावर्ती इलाकों में नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए ढांचागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है।प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की उन सभी गतिविधियों पर लगातार पैनी निगाह है जिनका भारत की सुरक्षा पर असर पड़ता है तथा देश की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।