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स्‍वदेशी उत्‍पादों से ग्लोबल मार्केट में चीन की झालरों की चमक पड़ी फीकी
महिलाएं बोलीं - प्रदेश सरकार की योजनाओं ने दिखाई राह
 
यूपी के उत्‍पादों की विदेशों में धूम, युगांडा और ताइवान ने यूपी में दिखाई दिलचस्‍पी . आईआईए भवन में महिलाओं को दी गई ट्रेनिंग

लखनऊ । दूसरे देश उत्‍तम व्‍यापार के लिए अवसरों वाले उत्‍तर प्रदेश की ओर अब तेजी से रूख कर रहे हैं। 24 करोड़ की आबादी वाले यूपी में प्रदेश सरकार ने महज साढ़े 4 सालों में सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमों को नई रफ्तार दी है। इन इकाइयों से खास कर ग्रामीण और शहरी महिलाओं को व्‍यापार में नए अवसर मिल रहे हैं। आज प्रदेश की महिलाएं गांव से निकलकर रोजगार की मुख्‍यधारा से जुड़ रही हैं। यह बातें इंडियन इंडस्‍ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के अध्‍यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहीं। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आईआईए भवन में बुधवार को स्‍वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में आईआईए के अध्‍यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि केन्‍द्र और राज्‍य सरकार की योजनाओं से सीधे तौर पर महिलाओं को लाभ मिल रहा है। निर्यात में उत्तर प्रदेश पांचवें पायदान पर है जिसको जल्‍द ही नंबर एक पर लाना है। आज महिलाएं गांव, कस्‍बों से बाहर निकल मेहनत कर अपने सपनों को पूरा कर रही हैं। केन्‍द्र व प्रदेश सरकार की योजनाएं महिलाओं के लिए ढाल बनी हैं। आज महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण व टूल-किट देकर उनको प्रदेश सरकार आत्‍मनिर्भर बना रही है। एमएसएमई और एक जनपद एक उत्‍पाद के जरिए प्रदेश के प्रत्‍येक जनपदों में छुपे हुनर को मंच मिला है वहीं व्‍यापार को भी नई दिशा मिली है।

चीन की मार्केट को स्‍वदेशी उत्‍पादों ने किया ध्‍वस्‍त

वूमेन विंग की हेड आनंदी अग्रवाल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों ने चाइनीज झालरों को मात दी है। आज स्‍वदेशी उत्‍पादों का बोलबाला देश के साथ विदेशों में भी हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के स्‍वदेशी उत्‍पादों को बढ़ावा देने के संकल्‍प को मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ अपने प्रयासों से पूरा कर रहे हैं। आज यूपी के झूमर-झालरों की मांग दूसरे राज्‍यों संग विदेशों में भी है। एनआरएलएम के जरिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ओडीओपी से कैसे जोड़ा जाए इस बारे में जानकारी दी गई। निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की अधिकारी शिवांगी सिंह ने हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं के बारे में बताते हुए डब्‍ल्‍यू स्कीम्स के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में सूर्य प्रकाश हवेलिया,चेतन भल्ला, सिडबी के डिप्टी जीएम श्रीकान्त मौजूद रहे।

युगांडा और ताइवान ने यूपी में दिखाई दिलचस्‍पी

अशोक अग्रवाल ने बताया कि सर्वाधिक जनसंख्‍या वाले यूपी में आज बड़े-बड़े देश निवेश करना चाहते हैं। ऐसे में नई तकनीक को प्रदेश में लाने व प्रशिक्षण कार्यकमों को आयोजित भी कराया जाएगा। उन्‍होंने बताया कि युगांडा और ताइवान ने आयात निर्यात, निवेश, तकनीक और प्रशिक्षण के लिए यूपी में दिलचस्‍पी दिखाई है। आगामी माह में आईआईए की टीम के कुछ लोग युगांडा जाएंगे।

प्रशिक्षण पाकर खिले महिलाओं के चेहरे

इण्डियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए)  परिसर में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसके तहत स्वयं सहायता समूह की 30 महिलाओं को एलईडी लाइट्स, झालर, एलईडी बल्ब और ओडीओपी प्रोडक्ट बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। देवरिया के विवेक सिंह ने इन महिलाओं को इससे जुड़ी सभी जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि अब तक मैं लगभग 6000 महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुका हूं। यूपी के अलग-अलग जनपदों में स्‍वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनको स्‍वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाता है। जिसके तहत महिलाओं को पांच दिन की ट्रेनिंग, 6000 से 10 हजार रुपए तक की टूल-किट दी जाती है।

देवरिया के झालर झूमर से विदेश भी हो रहा रोशन

-    देवरिया के विवेक सिंह ने बताया कि वीएस एनेर्जी इंटरप्राइजेज से डेकोरेटिव हैंडिक्राफ्ट और बैंबू लाइट का व्‍यापार करता हूं। उन्‍होंने बताया कि हमारे द्वारा तैयार की गई लाइट, झूमर और झालर की मांग नाईजीरिया, अफगानिस्तान, दुबई समेत देश के अलग राज्‍यों में मांग बढ़ रही है। उन्‍होंने बताया कि मिशन शक्‍त‍ि और महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए इस योजना के तहत सीधे तौर पर 6000 महिलाओं को रोजगार दिया है। इसके साथ ही देवरिया और दूसरे राज्‍यों में ग्रो-सेंटर बनाकर महिलाओ को एक ही छत के नीचे ट्रेनिंग दी जा रही है।

प्रदेश सरकार की योजनाओं ने दिखाई राह

काकोरी की रहने वाली देवी (हाउस वाइफ) ने बताया कि प्रदेश सरकार की योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है। आज महिलाएं योजनाओं के जरिए रोजगार की मुख्‍यधारा से जुड़ रहीं हैं। काकोरी की गुडिया (हाउस वाइफ)  ने बताया कि एलइडी लाइट, झूमर, एलईडी बल्ब तैयार करने का प्रशिक्षण हम लोगों को दिया जा रहा है। इस काम से कम पूंजी में साल भर तक हम लोग अपनी आय का एक नया जरिया तलाश पाए हैं। साल भर तक अलग अलग त्‍योहारों पर इन सबकी मांग बढ़ जाती है।