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सऊदी कमाने गए बलिया के मोहन की कोरोना से मौत

चार माह की अपनी बेटी का चेहरा भी न देख पाया मोहन, बिलखती रही पत्नी , अपने लाल का अंतिम झलक भी न देख सके परिजन

विजय बक्सरी

बलियाः परिजनों के दो जून की रोटी जुगत और अपने बच्चों के सुनहरे सपनों को पूरा करने के लिए सात समुंदर पार सऊदी कमाने गए बलिया के मोहन चैहान की कोरोना से मौत हो गई। 30 वर्षीय मोहन पिछले 9 साल से सऊदी के एक प्राइवेट कंपनी में बतौर वेल्डर का काम करते थे। आखिरी बार वे एक साल पूर्व अपने घर आएं थे। जहां वे पिछले कई दिनों से सर्दी व बुखार से पीड़ित थे। गत 24 मई को ही उसे कंपनी द्वारा पास के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। 26 मई को परिजनों से मोहन चैहान की आखिरी वार्ता हुई। मोहन ने अपने भाई दिनेश चैहान व पत्नी गीता देवी से मोबाइल पर वार्ता के दौरान बताया कि उसका कोविड-19 रिपोर्ट पाॅजिटीव आया है लेकिन सामान्य चरण में है, जल्द ही वह अस्पताल से ठीक होकर अपने कमरे पर चला जायेगा। जिसके बाद से ही परिजनों की चिंता बढ़ गई थी। इस बीच अचानक सोमवार को दोपहर 11 बजे कंपनी से पहले मैसेज आया और फिर मोबाइल फोन से सूचना दी गई कि मोहन अब नहीं रहे। जिसके बाद से ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पत्नी गीता बार-बार यह कहकर दहाड़े मार गिर जाती कि बाप को अपना चेहरा भी न दिखा सकी बिटीया। वहीं पिता चंद्रिका चैहान, मां कलावती देवी व भाई दिनेश चैहान, यशवेंद्र चैहान का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहन की मौत के साथ ही बूढ़े मां-बाप, भाई, पत्नी व बच्चों के हर उम्मीद का दीया पूरी तरह से बुझ सा गया। धीरे-धीरे घटना की जानकारी पूरे क्षेत्र में हो गई। जिसके बाद घर पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। हर कोई अपने गांव के मोहन की कोरोना से मौत की खबर सुन हैरान व परेशान था। पैक्सफेड के पूर्व चेयरमैन छट्टू राम ने तत्काल मौके पर पहुंच परिजनों को ढांढस बंधाया।

परिजनों को मिले 10 लाख आर्थिक मदद व नौकरी

– पैक्सफेड के पूर्व चेयरमैन छट्ठू राम ने परिजनों से मुलाकात के बाद न्यूज बास्केट पोर्टल संवाददाता को बताया कि मोहन चैहान अपने परिवार की उम्मीद था। जिसके मौत के बाद उसका शव तक परिजनों को मिलना लगभग संभव नहीं है। सरकार को ऐसे गरीब परिवार को भरपूर सहयोग के लिए स्वयं ही आगे आना चाहिए। श्री राम ने परिजनों को 10 लाख की आर्थिक मदद व एक सदस्य को नौकरी की मांग की है। साथ ही सऊदी एम्बेसी की मदद से प्राइवेट कंपनी की तरफ से भी भरपूर मदद कराने में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए।

एक साल पूर्व घर आया था मोहन, अपनी बेटी का चेहरा भी न देख सका

– नौ साल से सउदी के प्राइवेट कंपनी में काम कर रहा मोहन चैहान पिछले एक साल पूर्व अपने घर आया था। पिछले चार माह पूर्व उसे एक पुत्री हुई। जिससे मिलने के लिए वह कंपनी से स्वदेश लौटने को लेकर दो बार प्रयास कर चुका था किंतु कंपनी ने छुट्टी ही नहीं दी। इधर मोहन के मौत की खबर से अपने लाल के अंतिम झलक पाने को मां-बाप व पत्नी संग सभी परिजनों की उम्मीद पूरी होती नहीं दिख रही है। जिसकी कसक संग परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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