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दो माह बाद गंगा में उतरी अलकनंदा
वाराणसी। हिंदुओं के पवित्र सावन माह में काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। लगभग हर साल लाखों लोग बाबा काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं, तो स्थानीय मंदिरों में भी दर्शन पूजन का सिलसिला तेज हो जाता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कवायदें भी शुरू हो चुकी हैं। इधर …
 
दो माह बाद गंगा में उतरी अलकनंदा

वाराणसी। हिंदुओं के पवित्र सावन माह में काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है। लगभग हर साल लाखों लोग बाबा काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं, तो स्थानीय मंदिरों में भी दर्शन पूजन का सिलसिला तेज हो जाता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कवायदें भी शुरू हो चुकी हैं। इधर काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के मद्देनजर पतित पावनी गंगा में अलकनंदा जलपोत का संचालन भी शुरू हो गया। यह जलपोत संत रविदास घाट से राजघाट तक पर्यटकों को गंगा घाटों की मनोहारी छटा का दर्शन कराती रही। चाइनीज महामारी (कोरोना) का वेग बढ़ा तो हाल में इसे फिर बंद कर दिया गया था। धीरे – धीरे अब जब स्थिति सामान्य हो रही तो लगभग 68 दिन बाद उक्त जलपोत अलकनंदा को फिर से गंगा में उतार दिया गया है। फिलहाल 60 फ़ीसदी सैलानियों के साथ इस जलपोत को चलाने की अनुमति दी गई है। शाम को गंगा आरती व अन्य आयोजनों को देखने के लिए सैलानी भी अब तेजी से मिल रहे हैं। इधर सारनाथ में भी पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। सावन मेले के दौरान सारनाथ के साथ काशी नगरी में अपार भीड़ का होना भी अब तय माना जा रहा है।