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बैंक मैनेजर हत्याकांड: जमानत अर्जी खारिज
 

वाराणसी।  पिंडरा क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक का अपहरण कर उनकी हत्या किए जाने और रुपयों से भरा बैग लूटने के चर्चित मामले में जेल में बंद आरोपित शिवा उर्फ आदेश श्रीवास्तव को अदालत से जमानत नहीं मिली। शुक्रवार को जिला जज डा.अजय कृष्ण विश्वेश ने मंडुवाडीह थानांतर्गत लहरतारा क्षेत्र निवासी शिवा उर्फ आदेश श्रीवास्तव की जमानत अर्जी पर सुनवाई बाद उसे खारिज कर दिया। आरोपित के जमानत का विरोध जिला शासकीय अधिवक्ता आलोक चंद्र शुक्ल ने किया। 
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि नौ जून 2021 की सायं छह बजे पंजाब नेशनल बैंक करखियांव शाखा के प्रबंधक फूलचंद राम बैंक से घर जा रहे थे। रास्ते में कुछ लोगों ने उनका अपहरण कर लिया और उनकी हत्या कर दी। साथ ही उनके बैग में रखे 45 लाख रुपए लूट लिए। दौरान विवेचना आरोपित शिवा का नाम प्रकाश में आया। अभियोजन पक्ष की दलील थी कि शिवा उर्फ आदेश भी अन्य आरोपितों के साथ घटना में पूर्ण रुप से सम्मिलित रहा है।अपने साथियों के साथ षड्यंत्र कर बैंक मैनेजर का अपहरण कर उसकी हत्या करने में उसके द्वारा सक्रिय सहयोग किया गया है। पुलिस ने शिवा का उसके साथियों से दूरभाष पर की गई वार्ता का साक्ष्य संकलित की है। शिवा को सीएसआर फंड में रुपया दोगुना करने का कार्य करना बताया गया है। शिवा उर्फ आदेश 13 जून 2021 से जिला जेल में बंद है। इस प्रकरण में एक अन्य आरोपित अतुल कुमार सिंह की जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है।
अभियुक्त को कोर्ट ने दी सजा
वाराणसी। अपने मालिक की नाबालिग लड़की को धोखा देकर साथ ले जाने और कई दिनों तक बंधक बनाकर रखने के मामले में अदालत ने धमरिया (लोहता) गांव निवासी अभियुक्त एकलाक को दोषी करार देते हुए उसे दंडित किया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने उसे तीन साल के सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर अभियुक्त को तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर उपाध्याय ने पक्ष रखा। घटना 18 सितंबर 2013 की है। अभियुक्त पीड़िता के यहां पावरलूम चलाने का काम करता था।

जमानत अर्जी निरस्त
शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने के एक मामले में जिला जज डा.अजय कृष्ण विश्वेश ने लहुराबीर निवासी निर्णीत द्विवेदी की जमानत अर्जी 
निरस्त कर दिया। आरोपित की जमानत का विरोध जिला शासकीय अधिवक्ता आलोक चन्द्र शुक्ल ने किया। आरोपित एक सितंबर से जेल में निरुद्ध है।