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उदीयमान सूर्य को अ‌र्घ्य देने के बाद छठ महापर्व का समापन
 

उगते सूर्य को अर्ध्य के साथ ही बीते 3 दिनों से चल रहा छठ का महापर्व और व्रत आज पूरा हो गया. इस मौके पर वाराणसी के गंगा घाट पूरी तरह से छठ के रंग में रंगे दिखे। हर तरफ बस छठ पूजा का माहौल और अपने परिवार के साथ व्रतधारी महिलाएं। करीब 6 बज कर 40 मिनट पर जब सूर्य की लालिमा दिखनी शुरू हुई तो लाखों की भीड़ ने भास्कर देव को अपनी श्रद्धा अर्पित कर छठ का पर्व पूरा किया।

छठ के अंतिम दिन आज उगते सूर्य को अर्ध्य देने के लिए आधी रात से ही लोगों की भीड़ गंगा घाट पर उमड़नी शुरू हो गयी है. तमाम श्रद्धालु ऐसे थे जिन्होंने सूर्य देव के इंतज़ार में सारी रात गंगा घाट पर ही गुजारी। अभी रात की काली चादर हटी नहीं थी मगर पूजा की वेदियों पर जल रहे दीयों ने अँधेरे को मिटाना शुरू कर दिया था. गंगा घाटों दूर दूर तक जिधर भी देखो बस छठ पूजा का ही नज़ारा था. अँधेरा कम होने के साथ ही लोगों की नज़रें भी सूर्य देव को तलाशती आसमान पर टिक गयी. व्रतधारी महिलाएं अपने हाथों में फल, फूल से सजे सूप लेकर गंगा के पानी में उतर गयी. संभावित समय से करीब 20 मिनट की देरी से जब 6 बज कर 40 मिनट पर सर्व देव ने अपने दर्शन दिए तो लाखों की भीड़ ने उगते सूर्य को अर्ध्य देकर छठ का अपना व्रत पूरा किया। छठ के इस पर्व को लेकर लोगों में अटूट आस्था है. उनकी मानें तो सर्व देव और छठ मईया की उपासना से उनकी हर मुराद पूरी हुई है.
 

छठ की पूजा के लिए गंगा घाटों पर इस कदर भीड़ थी मानो तिल भर रखने की जगह ना हो. तमाम ऐसे श्रद्धालु जो वर्षों व्रत को करते चले आ रहे हैं तो कई ऐसे भी जिनके लिए यह पहला मौका था. मगर उनके भी मन में  लेकर आस्था और विश्वास उतना ही मजबूत और यह भरोसा आज छठ के व्रत से उनकी हर मुराद जरूर पूरी होगी। बिहार से शुरू हुआ यह प्रकृति की आराधना का यह महापर्व आज पुरे देश में उतने ही उल्लास के साथ मनाया जाता है. प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए बेहतर इंतज़ाम किये थे.