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आईआईटी(बीएचयू) फाउंडेशन को एलुमनी स्कॉलरशिप फंड के लिए मिले 2 मिलियन यूएस डॉलर
आईआईटी(बीएचयू) के 1989 बैच के पूर्व छात्र और यूएस की साइबरसुरक्षा कंपनी पालो अल्टो नेटवर्क्स के सीईओ निकेश अरोड़ा ने किया दान
 
आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को संस्थान में पढ़ने के लिए मिल सकेगी छात्रवृत्ति  

वाराणसी। आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेश (आईआईटी-बीएचयू पूर्व छात्रों का एक यूएस-आधारित ऑल वॉलंटियर नॉन प्रॉफिट एसोसिएशन) ने घोषणा की है कि आईआईटी(बीएचयू) के 1989 बैच के पूर्व छात्र और यूएस बेस्ड साइबरसुरक्षा कंपनी पालो अल्टो नेटवर्क्स के सीईओ श्री निकेश अरोड़ा ने आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेशन को 2 मिलियन यूएस डॉलर का दान दिया है। यह दान फाउंडेशन के एक्सेस फंड को सीड करेगा, जिससे वंचित छात्रों के लिए प्रमुख संस्थान में शिक्षा ग्रहण के लिए छात्रवृत्ति सक्षम हो जाएगी। इस उदार दान के लिए आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेशन आभारी है। संस्थान में नव प्रवेशी छात्र दिसंबर 2021 से आईआईटी(बीएचयू) फाउंडेशन की वेबसाइट पर वित्तीय आवश्यकता के आधार पर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकेंगे। फंड के माध्यम से सभी छात्रवृत्तियों का प्रबंधन आईआईटी(बीएचयू) फाउंडेशन छात्रवृत्ति समिति द्वारा किया जाएगा जिसके अध्यक्ष कुमार जयंत (ईईई 89) होंगे। साथ ही इस समिति में डीन (शैक्षणिक मामले) और डीन (संसाधन एवं पुरा छात्र) भी शामिल रहेंगे।
 
इस अवसर पर 1989 इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स आईआईटी (बीएचयू) स्नातक श्री निकेश अरोड़ा ने कहा, आईआईटी (बीएचयू) प्रौद्योगिकी में करियर के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड प्रदान करता है, और योग्य छात्रों को इन शैक्षणिक अवसरों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद करना हमारे लिए सम्मान की बात है। पूर्व छात्रों के रूप में, हम संस्थान के उल्लेखनीय कार्यक्रमों, सुविधाओं और संकाय के बारे में पहले से जानते हैं। पालो ऑल्टो नेटवर्क्स के साथ, मुझे आईआईटी (बीएचयू) का सहयोग करने पर गर्व है क्योंकि यह शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाता है और भविष्य के लीडर्स को प्रौद्योगिकी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैयार करता है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मेरी तरह कई और पुरातन छात्र संस्थान और संस्थान के छात्रों की प्रगति और विकास के लिए आगे आएंगे। 2 मिलियन डॉलर के दान में से, निकेश अरोड़ा 1 मिलियन डॉलर का योगदान करने के लिए अपने वार्षिक वेतन को छोड़ देंगे, वहीं पालो ऑल्टो नेटवर्क्स ने अतिरिक्त 1 मिलियन डॉलर का योगदान दिया। 2020 में वैश्विक कोविड राहत कोष में दान के बाद, यह दूसरा वर्ष है जब श्री अरोड़ा परोपकारी कारणों से दान करने के लिए अपने वेतन छोड़ देंगे।

आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेशन के अध्यक्ष अरुण त्रिपाठी (एमईसी 97) ने कहा कि श्री निकेश अरोड़ा इस बात का गौरवपूर्ण उदाहरण हैं कि आईआईटी (बीएचयू) के छात्र क्या हासिल कर सकते हैं। श्री त्रिपाठी ने कहा कि हम योग्य छात्रों को आईआईटी (बीएचयू) में भाग लेने में मदद करने के हमारे प्रयासों का समर्थन करने के लिए श्री निकेश को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने आगे बताया कि श्री निकेश की इच्छा थी कि एक्सेस फंड का नाम उनके नाम पर न रखा जाए - इस उम्मीद के साथ कि अन्य लोग इस प्रयास में शामिल होंगे। हमें उम्मीद है कि कई और पूर्व छात्र उनके नेतृत्व का अनुसरण करेंगे।”

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रोफेसर प्रमोद कुमार जैन और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने भी आभार व्यक्त किया और इंडोमेंट के महत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन एक्सेस फंड संस्थान की प्रतिष्ठा को बढ़ाने और योग्य छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक लंबा सफर तय करेगा। उपहार को स्वीकार करते हुए प्रोफेसर जैन ने कहा कि भविष्य के पुरा छात्रों के लिए वर्तमान के पुरा छात्रों का यह निरंतर समर्थन ही आईआईटी (बीएचयू) को वास्तव में अलग बनाता है। हम इस बड़े उपहार का केवल लाभ उठाकर अभिमान ही नहीं कर सकते, बल्कि संस्थान के बहुत से छात्र श्री निकेश अरोड़ा के इस असाधारण पदचिह्नों का भी अनुसरण करेंगे। 

श्री निकेश अरोड़ा के बारे में (ईईई ’89)
श्री निकेश अरोड़ा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) से 1989 में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक किया। वह जून 2018 में अध्यक्ष और सीईओ के रूप में पालो ऑल्टो नेटवर्क में शामिल हुए। पालो ऑल्टो नेटवर्क में शामिल होने से पहले, श्री निकेश ने सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प के अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में कार्य किया। इससे पहले, उन्होंने 10 वर्षों के दौरान गूगल कंपनी में कई पदों पर कार्य किया। जिसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य व्यवसाय अधिकारी, वैश्विक बिक्री संचालन और व्यवसाय विकास के अध्यक्ष और यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के अध्यक्ष पद शामिल हैं। गूगल में शामिल होने से पहले, निकेश ने डोए्च टेलीकॉम एजी के टी-मोबाइल इंटरनेशनल डिवीजन के लिए मुख्य विपणन अधिकारी की भूमिका निभाई। वह मुख्य कार्यकारी अधिकारी और टी-मोशन पीएलसी के संस्थापक थे, जिसका 2002 में टी-मोबाइल इंटरनेशनल में विलय हो गया था।

आईआईटी (बीएचयू) फाउंडेशन के बारे में
यूएस बेस्ड ऑल वॉलंटियर, 501 (सी) 3 नॉन-प्रॉफिट फाउंडेशन आईआईटी (बीएचयू) को अगले 100 वर्षों में एक ट्रेंडसेटिंग पायनियर के रूप में बदलने का प्रयास करता है, संस्थान के लक्ष्यों को हमारे पूर्व छात्रों और दाता नेटवर्क की उदारता के साथ सिंक्रनाइज़ करता है। अपने तरह के योगदान के माध्यम से पूंजी प्रवाह को बढ़ाने, आवंटित करने और प्रबंधित करने के इरादे से, फाउंडेशन, आईआईटी (बीएचयू) और आईआईटी (बीएचयू) ग्लोबल एलुमनी एसोसिएशन के साथ घनिष्ठ और निरंतर समन्वय में काम करता है।