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सतरंगी गुब्बारों में बैठ लोगों ने निहारा अपनी न्यारी काशी को

 आसमान से काशी के विहंगम दृश्यों को देखने का अवसर दे रहा है वाराणसी बैलून फेस्टिवल

 
-उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का प्रयास श्रद्धालुओं और पर्यटकों वाराणसी मिले प्राचीनता व आधुनिकता का सम्मिलित अनुभव

वाराणसी: बुधवार की सुबह वाराणसी के आकाश पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने नया इतिहास रच दिया। देव दीपावली के मौके पर पहली बार श्रद्धालुओं को घाटों की छटा आसमान से देखने को मिलेगी।  इस बहुप्रतीक्षित वाराणसी बैलून फेस्टिवल की शुरुआत उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने की है।  17 नवंबर की सुबह क्या आम क्या खास, बैलून में उड़ने वाला हर व्यक्ति उत्साहित व रोमांचित था।

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वाराणसी बैलून फेस्टिवल का शुभारंभ बुधवार की सुबह 6 बजे हुआ। हॉट एयर बैलून 17 से 19 नवंबर के बीच शहर के कई हिस्सों में उड़ाया जाएगा। साथ ही 18 और 19 नवम्बर की रात्रि में यह सुविधा टेडर्ड फ्लाइट के माध्यम से उपलब्ध होगी। बैलून उड़ान के माध्यम से श्रद्धालु व पर्यटक आसमान में उड़ान भर कर, वाराणसी व आसपास के विहंगम दृश्यों का अविमसरणीय  आनंद ले सकेंगे। हर गुब्बारे में तीस यात्री यात्रा कर सकेंगे। 

पर्यटन विभाग ने बैलून में उड़ान के लिए ₹500 रुपये प्रति टिकट मूल्य निर्धारित किया है।  इस आयोजन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टिकट बिक्री शुरू होने के तीन घण्टे के अंदर ही सारे टिकट्स बिक चुके हैं। 

वाराणसी नगर में गुब्बारों को उतारने और उतारने के लिए चार केंद्र बनाए गए हैं। डोमरी, सीएचएस स्पोर्ट्स ग्राउंड, बीएलडब्ल्यू स्पोर्ट्स ग्राउंड और सिगरा स्टेडियम, इन स्थानों पर गुब्बारों की उड़ान के लिए स्टेशन स्थापित हुए है। गुब्बारों की उड़ान के लिए स्थान का चयन हवा की दिशा देखकर ही तय किया जाएगा। गुब्बारे उड़ाने वाले सभी पायलट ऑयर ट्रैफिक कंट्रोल, वाराणसी के निर्देशों के अनुसार ही उड़ान भरेंगे। 

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का यह प्रयास अपने आप मे एक अनोखा आयोजन है, जो आने वाले समय मे वाराणसी के पर्यटन सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रसिद्धि देगा। इससे न केवल पर्यटन उद्योग में तेजी आएगी बल्कि बढ़े हुए पर्यटन से स्थानीय लोगों के रोजगार के नए आयाम भी सामने आएंगे।